“शिक्षा जीवन की तैयारी नहीं है; शिक्षा ही जीवन है।” ~ जॉन डेवी
– अभ्यास प्रश्न –
इकाई 19 – जल
1. सही विकल्प चुनकर अभ्यास पुस्तिका में लिखिए:
(क) जल का घनत्व किस ताप पर अधिकतम होता है-
(अ) 0°C
(ब) 4°C ✅
(स) – 4°C
(द) 100°C
(ख) इनमें से कौन जल के साथ तेजी से क्रिया करता है-
(अ) सोडियम ✅
(ब) कैल्सियम
(स) मैगनीशियम
(स) लोहा
(ग) जल की स्थाई कठोरता किसके कारण होती है-
(अ) कैल्सियम बाई कार्बोनेट
(ब) मैगनीशियम बाई कार्बोनेट
(स) कैल्सियम या मैगनीशियम के सल्फेट और क्लोराइड ✅
(द) इनमें से कोई नहीं
2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-
उत्तर-
(क) जंग लोहे का संक्षारण है।
(ख) जल में हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन का अनुपात 2 : 1 है।
(ग) जल एक प्रमुख विलायक है।
(घ) अस्थाई कठोरता कैल्सियम बाईकार्बोनेट और मैग्नीशियम बाई कार्बोनेट की उपस्थिति के कारण होती है।
(ङ) जल की स्थाई कठोरता धावन सोडा के द्वारा दूर किया जा सकता है।
3. सही कथन के आगे सही (✅) तथा गलत कथन के आगे क्रास (❌) का चिन्ह लगाइए-
उत्तर-
(क) कठोर जल को पीने के लिए उपयोग में लाना चाहिए। (❌)
(ख) अधिकांश ठोस पदार्थ की विलेयता ताप बढ़ाने पर बढ़ती है। (✅)
(ग) जल का क्वथनांक पानी की शुद्धता का परीक्षण करने में उपयोगी है। (✅)
(घ) समुद्री जल में अधिक मात्रा में नमक घुला होता है। (✅)
(ङ) वाष्पन की प्रक्रिया क्षेत्रफल पर निर्भर नहीं करती। (❌)
4. जल की कठोरता का क्या कारण है ? स्थाई कठोरता कैसे दूर करेंगे ?
ज़रूर, यहाँ जल की कठोरता के कारण और स्थायी कठोरता को दूर करने की विधि को सरल और व्यवस्थित तरीके से लिखा गया है।
💧 जल की कठोरता (Hardness of Water)
जल की कठोरता उसमें कैल्सियम (Ca2+) और मैगनीशियम (Mg2+) के घुलित लवणों की उपस्थिति के कारण होती है।
इन कठोरता उत्पन्न करने वाले लवणों के उदाहरण हैं:
- बाइकार्बोनेट (जैसे: कैल्सियम बाइकार्बोनेट, मैगनीशियम बाइकार्बोनेट)
- क्लोराइड (जैसे: कैल्सियम क्लोराइड (CaCl2), मैगनीशियम क्लोराइड (MgCl2)
- सल्फेट (जैसे: कैल्सियम सल्फेट (CaSO4), मैगनीशियम सल्फेट (MgSO4)
🧼 जल की स्थायी कठोरता दूर करने की विधि
स्थायी कठोरता वह कठोरता है जिसे केवल उबालकर दूर नहीं किया जा सकता। इसे दूर करने के लिए सोडियम कार्बोनेट (Washing Soda, $\text{Na}_2\text{CO}_3$) का उपयोग किया जाता है।
विधि (Procedure)
- सोडियम कार्बोनेट मिलाना: स्थायी कठोरता वाले जल में सोडियम कार्बोनेट(Na2CO3) की एक निश्चित मात्रा डाली जाती है।
- रासायनिक अभिक्रिया: जल में घुले हुए कठोरता उत्पन्न करने वाले लवण (जैसे CaCl2 या MgCl2) सोडियम कार्बोनेट के साथ अभिक्रिया करते हैं।
- अविलेय लवण का बनना: इस अभिक्रिया के परिणामस्वरूप, जल में अविलेय (Insoluble) कैल्सियम और मैगनीशियम कार्बोनेट लवण बनते हैं (जो अवक्षेप के रूप में होते हैं)।
CaCl2 + Na2CO3 -CaCO3(अविलेय) + 2NaCl - अलग करना: इन अविलेय लवणों को छानकर (Filtering) जल से अलग कर लिया जाता है।
परिणाम (Result)
इस प्रक्रिया के बाद प्राप्त जल साबुन के साथ आसानी से झाग देता है, जिसका अर्थ है कि जल की स्थायी कठोरता सफलतापूर्वक दूर हो गई है और अब यह मृदु जल (Soft Water) बन गया है।
5. जाड़े के मौसम में नदियों के जल की सतह पर बर्फ जमी होने पर भी जल के अन्दर के प्राणी कैसे जीवित रहते हैं?
उत्तर-
❄️ जाड़े में जलीय जीवों का जीवित रहना: वैज्ञानिक कारण
जलीय जीवों का जीवित रहना मुख्य रूप से जल के असंगत प्रसार (Anomalous Expansion of Water) और बर्फ के ऊष्मा रोधी (Insulating) गुण के कारण संभव होता है।
1. जल का असंगत प्रसार और अधिकतम घनत्व
- अधिकतम घनत्व: जल का यह अनूठा गुण है कि इसका घनत्व 4oC पर सबसे अधिक होता है।
- सतह का ठंडा होना: जब वायुमंडल का तापमान 4oC से कम होने लगता है, तो सतह का जल ठंडा होकर 4oC तक पहुँचता है। अधिक घनत्व के कारण यह 4oC वाला जल नीचे की ओर बैठ जाता है, और यह प्रक्रिया तब तक चलती है जब तक झील या नदी के तल (Bottom) का तापमान 4oC नहीं हो जाता।
- बर्फ का निर्माण: जब सतह का तापमान 4oC से और नीचे गिरकर 0oC तक पहुँचता है, तो सतह का जल जमना शुरू हो जाता है।
2. बर्फ की ऊष्मा रोधी परत (Insulation by Ice Layer)
- कम घनत्व: जमी हुई बर्फ का आयतन (Volume) अधिक और घनत्व (Density) कम होता है, इसलिए यह पानी की सतह पर तैरने लगती है।
- कवच का कार्य: बर्फ ऊष्मा की कुचालक (Poor Conductor of Heat) होती है। यह जमी हुई बर्फ की परत एक कवच (Insulating cover) की तरह पानी की सतह को पूरी तरह ढक लेती है।
- तापमान का संरक्षण: यह बर्फ की परत बाहर की अत्यधिक ठंडी हवा को पानी के अंदर नहीं पहुँचने देती और नीचे के जल की ऊष्मा को बाहर जाने से रोकती है।
🐠 निष्कर्ष
बर्फ की इस सुरक्षात्मक परत के कारण, भले ही सतह का तापमान 0oC या उससे नीचे चला जाए, लेकिन तलहटी के जल का तापमान 4oC पर बना रहता है। यह 4oC का तापमान जलीय जीवों के लिए जीवित रहने हेतु आवश्यक न्यूनतम तापमान होता है।
6. जल संरक्षण से होने वाले लाभ लिखिए ?
उत्तर-
💧 जल संरक्षण: महत्व और दूरगामी लाभ
जल संरक्षण का सीधा अर्थ है पानी की बचत करना और उसका समझदारी से उपयोग करना।
यह केवल वर्तमान आवश्यकता नहीं, बल्कि भविष्य के लिए एक दूरगामी लाभ है:
- भविष्य की पीढ़ी के लिए राहत: यदि हम आज अपने दैनिक जीवन में खर्च होने वाले जल का केवल $\mathbf{10\%}$ हिस्सा भी बचाना शुरू कर दें, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए पानी का संकट काफी हद तक कम हो जाएगा और उन्हें बड़ी राहत मिलेगी।
- संकटकाल में उपयोग: जल संकट या आपातकालीन स्थिति आने पर, यह बचाया हुआ जल हमारे लिए एक सुरक्षित भंडार (Reserve) का काम करेगा, जिसका उपयोग हम कठिनाई के समय कर सकेंगे।
- सामाजिक न्याय: जल संरक्षण के माध्यम से, हम उस पानी को बचाते हैं जो उन लोगों तक पहुँच सकता है जो पहले से ही जल संकट का सामना कर रहे हैं। यह पानी के वितरण में समानता और सामाजिक जिम्मेदारी सुनिश्चित करता है।
संक्षेप में, जल बचाना केवल एक अच्छी आदत नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है जो हमें वर्तमान और भविष्य, दोनों के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद करती है।
7. तालाब, नाली तथा शहरों के अपशिष्ट प्रदूषित जल के प्रदूषण कम करने तथा शुद्ध करने के उपाय का वर्णन कीजिए?
उत्तर-
तालाबों, नालियों और शहरों के अपशिष्ट प्रदूषित जल (सीवेज) के प्रदूषण को कम करने और उसे शुद्ध करने के लिए कई उपाय किए जाते हैं। इन उपायों को मुख्य रूप से जल उपचार संयंत्रों (Water Treatment Plants) में विभिन्न चरणों में लागू किया जाता है।
🌊 अपशिष्ट प्रदूषित जल को शुद्ध करने के उपाय
प्रदूषण कम करने और जल को शुद्ध करने के मुख्य उपाय संक्षेप में निम्नलिखित हैं:
1. भौतिक उपचार (Physical Treatment)
यह पहला चरण है, जिसमें जल से बड़े और तैरते हुए कणों को हटाया जाता है:
- छानना (Screening): जल को मोटी जाली (स्क्रीन) से गुजारा जाता है ताकि कपड़े, प्लास्टिक, लकड़ी के टुकड़े आदि ठोस अपशिष्ट को अलग किया जा सके।
- अवसादन (Sedimentation): छने हुए जल को बड़े टैंकों में स्थिर रखा जाता है। इसमें रेत, बजरी और अन्य भारी अशुद्धियाँ गुरुत्वाकर्षण के कारण नीचे बैठ जाती हैं (तलछट या स्लज के रूप में)।
- स्कंदन (Coagulation): जल में फिटकरी (Alum) जैसे रसायन मिलाए जाते हैं, जो महीन कणों को एक साथ जमा करके बड़े गुच्छे (Flocs) बनाते हैं, जिससे वे आसानी से नीचे बैठ जाते हैं।
2. जैविक उपचार (Biological Treatment)
इस चरण में जल में घुले हुए कार्बनिक पदार्थों और हानिकारक रोगाणुओं को हटाया जाता है:
- वातन (Aeration): जल में हवा (ऑक्सीजन) पंप की जाती है। यह लाभदायक जीवाणुओं (Aerobic Bacteria) को बढ़ने में मदद करता है।
- जीवाणुओं द्वारा अपघटन: ये जीवाणु जल में मौजूद कार्बनिक पदार्थों (मल-मूत्र, भोजन के कण) को खाकर उनका सरल और हानिरहित पदार्थों (जैसे कार्बन डाइऑक्साइड और पानी) में अपघटन (Decomposition) कर देते हैं।
- सक्रियित गाद प्रक्रिया (Activated Sludge Process): यह सबसे आम जैविक प्रक्रिया है, जहाँ जीवाणु गाद (Sludge) में जमा होकर प्रदूषणकारी तत्वों को हटाते हैं।
3. रासायनिक उपचार एवं रोगाणुनाशन (Chemical Treatment & Disinfection)
यह अंतिम चरण है, जो जल को उपयोग के लिए सुरक्षित बनाता है:
- निस्पंदन (Filtration): जैविक उपचार के बाद जल को रेत और कार्बन फिल्टर (Filter) से गुजारा जाता है ताकि शेष बचे महीन कणों और जीवाणुओं को हटाया जा सके।
- रोगाणुनाशन (Disinfection): शुद्ध किए गए जल में क्लोरीन या ओजोन मिलाया जाता है, या पराबैंगनी (UV) प्रकाश से गुजारा जाता है।
- यह प्रक्रिया जल में बचे हुए हानिकारक जीवाणुओं और विषाणुओं (Pathogens) को पूरी तरह से मार देती है।
इन तीनों चरणों के बाद प्राप्त जल पर्यावरण में छोड़ा जाता है या पुनः उपयोग के लिए उपयुक्त हो जाता है।
प्रोजेक्ट कार्य–
नोट –प्रोजेक्ट कार्य छात्र स्वयं करेंगे
प्रश्नोत्तरी [ quiz ]
इकाई 19 – जल
COMING SOON
प्रश्नोत्तरी अभी तैयार की जा रही है जल्द ही आपके लिए प्रस्तुत की जाएगी
