“शिक्षा जीवन की तैयारी नहीं है; शिक्षा ही जीवन है।” ~ जॉन डेवी
– अभ्यास प्रश्न –
इकाई 16 – प्रकाश
1. निम्नलिखित प्रश्नों में सही विकल्प छाँट कर अभ्यास पुस्तिका में लिखिए-
(क) उत्तल दर्पण के सामने रखी वस्तु का प्रतिबिम्ब बनता है
(अ) दर्पण के दूसरी ओर
(ब) वक्रता केन्द्र पर
(स) अनन्त पर
(द) वक्रता केन्द्र तथा मुख्य फोकस के मध्य ✅
(ख) एक दर्पण के सामने खड़ा होने पर आपका दर्पण में प्रतिबिम्ब हमेशा सीधा प्रतीत होता है, दर्पण होगा-
(अ) समतल
(ब) उत्तल ✅
(स) अवतल
(द) समतल या उत्तल
(ग) दूर स्थित किसी ऊँची इमारत की सम्पूर्ण ऊँचाई जिस दर्पण में देखी जा सकती है वह दर्पण है-
(अ) अवतल
(ब) उत्तल
(स) समतल ✅
(द) समतल तथा अवतल दर्पण
2. रिक्त स्थानों की पूर्ति करें-
उत्तर-
(क) समतल द्वारा बना प्रतिबिम्ब आभासी होता है।
(ख) जो प्रतिबिम्ब सीधा बनता है उसकी आकृति आभासी होती है।
(ग) यदि आपतन कोण का मान 60° तो परावर्तन कोण का मान 60° होगा।
(घ) दर्पण के ध्रुव व वक्रता केन्द्र के बीच की दूरी फोकस दूरी कहलाती है।
3. निम्नलिखित में स्तम्भ क के कथनों को स्तम्भ ख के कथनों से सुमेलित कीजिए-
उत्तर-

4. निम्नलिखत कथनों में सही के सामने सही (✅) तथा गलत के सामने गलत (❌) का चिह्न लगाइए-
उत्तर-
(क) आपतित किरण, परावर्तित किरण तथा अभिलम्ब एक तल में नहीं होते। (❌)
(ख) परावर्तन के नियम से आपतन कोण, परावर्तन कोण के बराबर होता है। (✅)
(ग) परावर्तन का नियम सभी प्रकार के दर्पणों के लिए लागू होता है। (❌)
(घ) समतल दर्पण द्वारा बने प्रतिबिम्ब को पर्दे पर लिया जा सकता है। (❌)
(ङ) अवतल दर्पण से कभी आभासी प्रतिबिम्ब नहीं बनता है। (❌)
5. गोलीय दर्पण के लिए ध्रुव, वक्रता केन्द्र, मुख्य फोकस तथा मुख्य अक्ष की परिभाषा दीजिए। रेखा चित्र बनाकर इनकी स्थितियों को प्रदर्शित कीजिए।
उत्तर-
गोलीय दर्पण (Spherical Mirror) के लिए ध्रुव, वक्रता केंद्र, मुख्य फोकस और मुख्य अक्ष की परिभाषाएँ निम्नलिखित हैं:


1. ध्रुव (Pole, P) 🌠
परिभाषा: गोलीय दर्पण का ध्रुव (P) दर्पण के परावर्तक पृष्ठ का मध्य बिंदु होता है। यह दर्पण की सतह पर स्थित होता है।
2. वक्रता केंद्र (Centre of Curvature, C) ⭕
परिभाषा: गोलीय दर्पण एक खोखले गोले का भाग होता है, जिसका वह पृष्ठ परावर्तक का कार्य करता है। इस खोखले गोले का केंद्र ही दर्पण का वक्रता केंद्र (C) कहलाता है।
- अवतल दर्पण (Concave Mirror) के लिए यह दर्पण के सामने होता है।
- उत्तल दर्पण (Convex Mirror) के लिए यह दर्पण के पीछे होता है।
3. मुख्य फोकस (Principal Focus, F) 💡
परिभाषा: गोलीय दर्पण के मुख्य अक्ष के समानांतर चलने वाली प्रकाश किरणें परावर्तन के बाद जिस एक बिंदु पर मिलती हैं या मिलती हुई प्रतीत होती हैं, उस बिंदु को दर्पण का मुख्य फोकस (F) कहते हैं।
- अवतल दर्पण में किरणें वास्तव में मिलती हैं।
- उत्तल दर्पण में किरणें पीछे बढ़ाने पर मिलती हुई प्रतीत होती हैं।
4. मुख्य अक्ष (Principal Axis) 📏
परिभाषा: गोलीय दर्पण के ध्रुव (P) और वक्रता केंद्र (C) को मिलाने वाली काल्पनिक सीधी रेखा को दर्पण का मुख्य अक्ष कहते हैं।
संक्षेप में, मुख्य अक्ष वह रेखा है जिस पर ध्रुव (P), फोकस (F), और वक्रता केंद्र (C) स्थित होते हैं।
6. निम्नलिखित में अंतर स्पष्ट कीजिए-
(क) वास्तविक तथा आभासी प्रतिबिम्ब।
उत्तर –
वास्तविक (Real) तथा आभासी (Virtual) प्रतिबिंब में मुख्य अंतर निम्नलिखित हैं:
वास्तविक तथा आभासी प्रतिबिंब में अंतर ✨
| गुणधर्म | वास्तविक प्रतिबिंब (Real Image) | आभासी प्रतिबिंब (Virtual Image) |
| किरणों का मिलन | प्रकाश किरणें परावर्तन या अपवर्तन के बाद वास्तव में एक बिंदु पर मिलती हैं। | प्रकाश किरणें परावर्तन या अपवर्तन के बाद एक बिंदु पर मिलती हुई प्रतीत होती हैं। |
| पर्दे पर प्राप्ति | इसे पर्दे (Screen) पर प्राप्त किया जा सकता है। | इसे पर्दे पर प्राप्त नहीं किया जा सकता है। इसे केवल आँखों द्वारा देखा जा सकता है। |
| प्रकृति (दर्पणों के संदर्भ में) | यह वस्तु के सापेक्ष हमेशा उल्टा (Inverted) होता है। | यह वस्तु के सापेक्ष हमेशा सीधा (Erect) होता है। |
| स्थान | यह सामान्यतः दर्पण के सामने (या लेंस के पीछे) बनता है। | यह सामान्यतः दर्पण के पीछे (या लेंस के सामने) बनता है। |
| उदाहरण | सिनेमा हॉल में प्रोजेक्टर द्वारा स्क्रीन पर बनने वाला चित्र। अवतल दर्पण द्वारा बना अधिकांश प्रतिबिंब। | समतल दर्पण और उत्तल दर्पण द्वारा बने प्रतिबिंब। |
संक्षेप में, वास्तविक प्रतिबिंब वहाँ बनता है जहाँ प्रकाश किरणें वास्तव में मिलती हैं, इसे पर्दे पर लिया जा सकता है और यह हमेशा उल्टा होता है। वहीं, आभासी प्रतिबिंब वहाँ बनता है जहाँ किरणें मिलती हुई प्रतीत होती हैं, इसे पर्दे पर नहीं लिया जा सकता और यह हमेशा सीधा होता है।
(ख) अवतल दर्पण तथा उत्तल दर्पण ।
उत्तर-
अवतल दर्पण (Concave Mirror) और उत्तल दर्पण (Convex Mirror) में मुख्य अंतर नीचे सारणीबद्ध किए गए हैं:
अवतल दर्पण और उत्तल दर्पण में अंतर 🧐
| गुणधर्म | अवतल दर्पण (Concave Mirror) | उत्तल दर्पण (Convex Mirror) |
| परावर्तक सतह | अंदर की ओर मुड़ी हुई (दबी हुई) होती है। | बाहर की ओर उभरी हुई होती है। |
| प्रकाश किरणों पर प्रभाव | प्रकाश किरणों को अभिसरित (इकट्ठा) करता है। इसे अभिसारी दर्पण (Converging Mirror) भी कहते हैं। | प्रकाश किरणों को अपसरित (फैलाता) करता है। इसे अपसारी दर्पण (Diverging Mirror) भी कहते हैं। |
| प्रतिबिंब की प्रकृति | यह वास्तविक और आभासी दोनों प्रकार के प्रतिबिंब बना सकता है (वस्तु की स्थिति पर निर्भर करता है)। | यह हमेशा आभासी (Virtual) प्रतिबिंब बनाता है। |
| प्रतिबिंब का आकार | प्रतिबिंब बड़ा, छोटा या वस्तु के आकार का बन सकता है। | प्रतिबिंब हमेशा वस्तु से छोटा (Diminished) बनता है। |
| प्रतिबिंब की स्थिति | प्रतिबिंब उल्टा या सीधा बन सकता है। | प्रतिबिंब हमेशा सीधा (Erect) बनता है। |
| फोकस दूरी ($f$) | फोकस दूरी ऋणात्मक होती है (चिन्ह परिपाटी के अनुसार)। | फोकस दूरी धनात्मक होती है (चिन्ह परिपाटी के अनुसार)। |
| उपयोग | दाढ़ी/शेविंग दर्पण, टॉर्च, हेडलाइट, सोलर कुकर आदि में। | वाहनों में साइड व्यू/रियर व्यू दर्पण, सुरक्षा दर्पणों में। |
7. समान्तर प्रकाश किरण, अभिसारी प्रकाश किरण तथा अपसारी प्रकाश किरण पुंज का सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर-

(अ) समान्तर प्रकाश किरण – जब प्रकाश किरण पुंज की सभी किरणे समान्तर होती हैं, उसे समानान्तर प्रकाश-पुंज कहते हैं।
(ब) अभिसारी प्रकाश किरण – जब प्रकाश किरण पुंज की सभी किरणे किसी एक बिंदु पर मिलती हैं, उसे अभिसारी किरण पुंज कहते हैं।
(स) अपसारी प्रकाश किरण – जब प्रकाश किरण पुंज की सभी किरणे किसी बिंदु से फैलती हुई प्रतीत होती है, उसे अपसारी प्रकाश किरण पुंज कहते हैं।
8. अवतल दर्पण का फोकस वास्तविक है जबकि उत्तल दर्पण का फोकस काल्पनिक। स्पष्ट कीजिए।
संक्षेप में, इसका कारण प्रकाश किरणों पर दर्पणों का अलग-अलग व्यवहार है:
अवतल दर्पण का फोकस: वास्तविक (Real)
- किरणों का अभिसरण: अवतल दर्पण को अभिसारी दर्पण (Converging Mirror) कहते हैं क्योंकि मुख्य अक्ष के समांतर आने वाली प्रकाश किरणें परावर्तन के बाद दर्पण के सामने एक बिंदु पर वास्तव में मिलती हैं।
- वास्तविक फोकस: चूँकि किरणें वास्तव में मिलती हैं, इसलिए यह बिंदु वास्तविक फोकस (F) कहलाता है, जो दर्पण के सामने स्थित होता है।
उत्तल दर्पण का फोकस: काल्पनिक (Virtual)
- किरणों का अपसरण: उत्तल दर्पण को अपसारी दर्पण (Diverging Mirror) कहते हैं क्योंकि यह मुख्य अक्ष के समांतर आने वाली प्रकाश किरणों को परावर्तन के बाद फैला (Diverge) देता है।
- काल्पनिक फोकस: ये फैली हुई किरणें वास्तव में कभी नहीं मिलती हैं। लेकिन जब इन परावर्तित किरणों को पीछे की ओर बढ़ाया जाता है, तो वे दर्पण के पीछे एक बिंदु पर मिलती हुई प्रतीत होती हैं। इस कारण यह बिंदु काल्पनिक फोकस (F) कहलाता है।
9. किसी अवतल दर्पण को ध्रुव तथा फोकस के बीच रखी गयी वस्तु का दर्पण द्वारा बने प्रतिबिम्ब को प्रदर्शित करने के लिए आवश्यक किरण आरेख बनाइए।
उत्तर-

10. निम्न प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
(क) उस दर्पण का नाम लिखिए जिससे वस्तु के आकार का आभासी प्रतिबिम्ब बनता है।
उत्तर- उस दर्पण का नाम समतल दर्पण (Plane Mirror) है जिससे वस्तु के आकार का आभासी प्रतिबिम्ब (Virtual Image) बनता है।
(ख) उत्तल दर्पण के मुख्य फोकस की परिभाषा दीजिए।
उत्तल दर्पण के मुख्य अक्ष के समांतर आने वाली प्रकाश की किरणें, दर्पण से परावर्तन के पश्चात, मुख्य अक्ष पर स्थित जिस बिंदु से आती हुई प्रतीत होती हैं (या अपसरित होती हुई प्रतीत होती हैं), उस बिंदु को उत्तल दर्पण का मुख्य फोकस (F) कहते हैं।
(ग) स्ट्रीट लाइट में प्रयोग किए जाने वाले दर्पण का नाम लिखिए।
उत्तर- स्ट्रीट लाइट (सड़क की रोशनी) में इस्तेमाल किए जाने वाले दर्पण का नाम है उत्तल दर्पण (Convex Mirror)।
(घ) दर्पण के पृष्ठ भाग पर चाँदी की कलई की जाती है क्यों ?
उत्तर- परावर्तन (Reflection) के लिए: काँच स्वयं प्रकाश को केवल थोड़ा-सा ही परावर्तित करता है। जब काँच की पिछली सतह पर चाँदी की एक पतली, चिकनी परत चढ़ाई जाती है, तो यह परत आपतित (गिरने वाले) प्रकाश के लगभग 95% भाग को परावर्तित कर देती है। यही परावर्तन हमें स्पष्ट प्रतिबिम्ब (Image) देखने में सक्षम बनाता है।
(ङ) उत्तल एवं अवतल दर्पण को गोलीय दर्पण कहते हैं। क्यों ?
उत्तर-
उत्तल (Convex) और अवतल (Concave) दर्पण को गोलीय दर्पण (Spherical Mirror) इसलिए कहा जाता है क्योंकि ये दोनों दर्पण एक खोखले गोले (Hollow Sphere) के कटे हुए भाग होते हैं।
🪞 गोलीय दर्पण की संरचना
- जब किसी काँच के खोखले गोले के एक छोटे से भाग को काट लिया जाता है, तो हमें एक घुमावदार (Curved) दर्पण मिलता है।
- इस कटे हुए भाग की सतह को पॉलिश करके परावर्तक बनाया जाता है:
- यदि परावर्तन भीतरी (दबे हुए) पृष्ठ से होता है, तो वह अवतल दर्पण (Concave Mirror) कहलाता है।
- यदि परावर्तन बाहरी (उभरे हुए) पृष्ठ से होता है, तो वह उत्तल दर्पण (Convex Mirror) कहलाता है।
चूँकि इन दोनों दर्पणों का परावर्तक पृष्ठ एक गोले का हिस्सा होता है, इसलिए इन्हें सामूहिक रूप से गोलीय दर्पण कहा जाता है।
12.
(क) उत्तल दर्पण के मुख्य फोकस की परिभाषा दीजिए तथा आवश्यक किरण आरेख बनाइए।
उत्तर-
📌 उत्तल दर्पण के मुख्य फोकस की परिभाषा
उत्तल दर्पण का मुख्य फोकस (Principal Focus, F) मुख्य अक्ष पर वह बिंदु होता है, जहाँ मुख्य अक्ष के समांतर आने वाली प्रकाश की किरणें, दर्पण से परावर्तन के पश्चात् आती हुई प्रतीत होती हैं।
दूसरे शब्दों में, यह वह बिंदु है जहाँ से परावर्तित किरणें अपसारित (फैलती) हुई दिखाई देती हैं।
- यह फोकस आभासी (Virtual) होता है।
- यह दर्पण के पीछे स्थित होता है।
📐 आवश्यक किरण आरेख (Ray Diagram)
आवश्यक किरण आरेख नीचे दर्शाया गया है।

किरण आरेख का विवरण:
- मुख्य अक्ष (Principal Axis): दर्पण के ध्रुव (P) और वक्रता केंद्र (C) से होकर गुजरने वाली काल्पनिक सीधी रेखा।
- आपतित किरणें (Incident Rays): दो प्रकाश किरणें जो मुख्य अक्ष के समांतर दर्पण पर गिरती हैं।
- परावर्तन (Reflection): उत्तल दर्पण (अपसारी दर्पण) इन किरणों को फैला देता है।
- मुख्य फोकस (F): जब इन परावर्तित किरणों को दर्पण के पीछे की ओर बढ़ाया जाता है (डॉटेड लाइन द्वारा), तो वे मुख्य अक्ष पर एक बिंदु पर मिलती हुई प्रतीत होती हैं। यही बिंदु मुख्य फोकस (F) कहलाता है।
- वक्रता केंद्र (C): फोकस, F, वक्रता केंद्र C और ध्रुव P के ठीक बीच में स्थित होता है।
(ख) परावर्तन के नियमों को लिखिए।
उत्तर-
परावर्तन (Reflection) के दो मुख्य नियम हैं –
✨ परावर्तन के नियम (Laws of Reflection)
1. पहला नियम (First Law)
आपतित किरण, परावर्तित किरण और आपतन बिंदु पर खींचा गया अभिलम्ब, ये तीनों एक ही समतल (Plane) में होते हैं।
- अर्थात्, यदि आपतित किरण एक समतल में है, तो परावर्तित किरण और अभिलम्ब भी उसी समतल में होंगे।
2. दूसरा नियम (Second Law)
परावर्तन कोण (The angle of reflection) हमेशा आपतन कोण (The angle of incidence) के बराबर होता है।
∠r = ∠i
ये नियम समतल दर्पणों के साथ-साथ सभी प्रकार के गोलीय दर्पणों (अवतल और उत्तल) और किसी भी परावर्तक सतह पर मान्य होते हैं।
क्या आप प्रकाश के अपवर्तन (Refraction) के नियमों के बारे में भी जानना चाहेंगे?
13.
(क) पार्श्व परिवर्तन क्या है? समतल दर्पण से बने प्रतिबिम्ब पार्श्व परिवर्तन दर्शाइए।
उत्तर-
🔄 पार्श्व परिवर्तन क्या है? (What is Lateral Inversion?)
पार्श्व परिवर्तन (Lateral Inversion) वह प्रकाशीय घटना है जिसके कारण जब किसी वस्तु का प्रतिबिम्ब समतल दर्पण में बनता है, तो वस्तु का दायाँ भाग (Right side) प्रतिबिम्ब में बायाँ भाग दिखाई देता है, और वस्तु का बायाँ भाग (Left side) प्रतिबिम्ब में दायाँ भाग दिखाई देता है।
दूसरे शब्दों में, यह प्रतिबिम्ब में पार्श्विक (किनारों का) उलट जाना है, जबकि ऊपरी और निचला भाग अपरिवर्तित (सीधा) रहता है।
उदाहरण: जब आप दर्पण के सामने अपना दायाँ हाथ उठाते हैं, तो प्रतिबिम्ब में आपका बायाँ हाथ उठता हुआ दिखाई देता है। इसी कारण आपातकालीन वाहनों (जैसे एम्बुलेंस) पर शब्द उल्टे लिखे जाते हैं, ताकि सामने वाले वाहन के ड्राइवर को अपने पश्च-दृश्य दर्पण (Rear-view mirror) में वे शब्द सीधे दिखाई दें।
🖼️ समतल दर्पण से बने प्रतिबिम्ब में पार्श्व परिवर्तन
समतल दर्पण से बने प्रतिबिम्ब में पार्श्व परिवर्तन को समझने के लिए, हम एक अक्षर ‘P’ का उपयोग करके किरण आरेख बना सकते हैं:
किरण आरेख का प्रदर्शन (Diagrammatic Representation)

जब परावर्तित किरणों को दर्पण के पीछे बढ़ाया जाता है, तो प्रतिबिम्ब में अक्षर ‘B’ पार्श्व रूप से उल्टा दिखाई देता है।
इस घटना को पार्श्व परिवर्तन कहा जाता है।
(ख) अंग्रेजी वर्णमाला के किन-किन अक्षरों के समतल दर्पण द्वारा बने प्रतिबिम्बों में पार्श्व परिवर्तन प्रतीत नहीं होता।
उत्तर-
अंग्रेजी वर्णमाला के 11 कैपिटल अक्षर (Capital Letters) जिनके समतल दर्पण द्वारा बने प्रतिबिम्बों में पार्श्व परिवर्तन (Lateral Inversion) प्रतीत नहीं होता है, वे हैं जिनमें सममिति (Symmetry) होती है।
इन अक्षरों को यदि ऊर्ध्वाधर रेखा (vertical line) के सापेक्ष आधा-आधा काटा जाए, तो दोनों भाग एक-दूसरे के दर्पण प्रतिबिम्ब होते हैं। इसी कारण, जब इन्हें समतल दर्पण के सामने रखा जाता है, तो वे उल्टे नहीं दिखते (अर्थात् पार्श्व परिवर्तन प्रतीत नहीं होता)।
ये अक्षर निम्नलिखित हैं:
Y H I O X A M T U V W
प्रोजेक्ट कार्य–
नोट –प्रोजेक्ट कार्य छात्र स्वयं करेंगे
प्रश्नोत्तरी [ quiz ]
इकाई 16 – प्रकाश
COMING SOON
प्रश्नोत्तरी अभी तैयार की जा रही है जल्द ही आपके लिए प्रस्तुत की जाएगी
