“शिक्षा जीवन की तैयारी नहीं है; शिक्षा ही जीवन है।” ~ जॉन डेवी
– अभ्यास प्रश्न –
इकाई 7 – जीवों में अनुकूलन
1. सही विकल्प को छाँटकर अपनी अभ्यास पुस्तिका में लिखिए
(क) मेढक रहता है –
(i) स्थल पर
(ii) जल में
(iii) जल तथा स्थल दोनों जगह ✅
(iv) वायु में
(ख) मछली साँस लेती है –
(i) गिल्स द्वारा ✅
(ii) फेफड़े द्वारा
(iii) त्वचा द्वारा
(iv) पंखों द्वारा
(ग) ऊँट के कूबड़ में संचित होता है।
(i) वसा ✅
(ii) कार्बोहाइड्रेट
(iii) प्रोटीन
(iv) खनिज लवण
(घ) खानज लव नागफनी का पौधा है –
(i) जलीय
(ii) मरूस्थलीय ✅
(iii) उपरिरोही
(iv) आरोही
(ङ) जलीय वातावरण में पाये जाने वाला पौधा है –
(i) मटर
(ii) सिंघाड़ा ✅
(iii) आलू
(iv) मक्का
2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-
उत्तर-
(क) मेढक पानी में श्वसन त्वचा द्वारा करता है।
(ख) नागफनी एक मरुस्थलीय वातावरण का पौधा है।
(ग) अल्प विकसित जड़े तथा वायु मृदूतक जलीय पौधों में पाया जाता है।
(घ) आलू एक भूमिका पौधा है।
(ङ) पक्षियों की हड्डियाँ खोखली होती हैं।
3. सही कथन के आगे सही (✅) तथा गलत कथन के आगे गलत (❌) का चिहून लगाएँ-
उत्तर-
(क) मरुस्थलीय पौधे कोमल तथा कमजोर तने वाले होते हैं। (❌)
(ख) पक्षियों की हड्डी खोखली तथा वायु से भरी होती है। (✅)
(ग) मरुभिद पौधों में जड़ें, अल्प विकसित होती हैं। (❌)
(घ) शरीर पर घने तथा लम्बे बाल और त्वचा के नीचे वसा की मोटी परत ठण्डे प्रदेशों में रहने वाले जन्तुओं में वातावरण से अनुकूलन करने में सहायक होता है। (✅)
4. स्तम्भ ‘क’ का.स्तम्भ ‘ख’ से मिलान कीजिए
उत्तर-

5. अनुकूलन किसे कहते हैं। मरूस्थलीय जीव में अनुकूलन को संक्षेप में स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
🌵 अनुकूलन (Adaptation)
अनुकूलन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके द्वारा कोई जीव अपने पर्यावरण में जीवित रहने, बढ़ने और प्रजनन करने के लिए अपनी संरचना (शारीरिक बनावट), कार्यिकी (शरीर के आंतरिक कार्य) या व्यवहार में परिवर्तन विकसित करता है। ये परिवर्तन पीढ़ी-दर-पीढ़ी प्राकृतिक चयन के माध्यम से विकसित होते हैं।
🐪 मरूस्थलीय जीवों में अनुकूलन
मरुस्थल (Desert) वह स्थान है जहाँ पानी की अत्यधिक कमी और तापमान की अधिकता होती है। इन कठोर परिस्थितियों में जीवित रहने के लिए, मरुस्थलीय जीवों (पौधों और जन्तुओं) में विशिष्ट अनुकूलन पाए जाते हैं:
1. मरुस्थलीय पौधों में अनुकूलन (Adaptation in Xerophytes)
मरुस्थलीय पौधों का मुख्य लक्ष्य पानी को बचाना और उसे अवशोषित करना होता है।
मरुस्थलीय जन्तुओं का मुख्य लक्ष्य पानी संरक्षित करना और शरीर को ठंडा रखना होता है।
| 1. मरुस्थलीय पौधों में अनुकूलन | 2. मरुस्थलीय जन्तुओं में अनुकूलन |
| पत्तियों का काँटों में रूपांतरण | जल संचय |
| गूदेदार तना (Succulent Stem) | खुरदरी त्वचा |
| मोटी उपत्वचा (Thick Cuticle) | गद्देदार तलवे और लंबे पैर |
| गहरी जड़ें | अधिक बाल |
| रंध्रों का रात में खुलना (CAM मार्ग) | रात्रिचर व्यवहार |
6. जलीय जीवों में अनुकूलन की विशेषताओं को संक्षेप में लिखिए।
उत्तर-
जलीय जीवों में अनुकूलन की विशेषताओं का संक्षिप्त विवरण दिया गया है:
🌊 जलीय अनुकूलन (संक्षेप में)
| विशेषता (Feature) | उद्देश्य (Purpose) |
| धारा रेखित शरीर | पानी में घर्षण कम करके तेज़ी से तैरना। |
| पंख/फ्लिपर | तैरना, संतुलन और दिशा बदलना। |
| क्लोम (Gills) | पानी में घुली ऑक्सीजन से श्वसन करना। |
| जलरोधी शल्क/त्वचा | शरीर को सुरक्षित रखना और गति सुगम बनाना। |
| वायुकोष | पानी में गहराई (प्लवनशीलता) नियंत्रित करना। |
| वसा की परत (Blubber) | ठंडे पानी में शरीर का तापमान बनाए रखना। |
7. उभयचर जीवों में अनुकूलन को संक्षेप में उदाहरण सहित बताइए।
उत्तर-
🐸 उभरचर जीव (जैसे मेढक) में उभयचर अनुकूलन
उभरचर जीव (जैसे मेढक) में पाए जाने वाले अनुकूलन उसे जल (पानी) और थल (जमीन) दोनों स्थानों पर सफलतापूर्वक जीवन जीने में सक्षम बनाते हैं।
उभरचर जीव (जैसे मेढक) में श्वसन के लिए दोहरे अनुकूलन पाए जाते हैं:
- स्थल पर: जब मेढक जमीन पर होता है, तो वह फेफड़ों (Lungs) की सहायता से हवा में मौजूद ऑक्सीजन को श्वास लेता है।
- जल में: जब मेढक पानी के भीतर होता है, तो वह अपनी नम और पतली त्वचा (Moist Skin) के माध्यम से पानी में घुली ऑक्सीजन का सीधे अवशोषण करके श्वसन करता है।
उभरचर जीव (जैसे मेढक) की टाँगों की संरचना उसे दोनों आवासों में गति करने में मदद करती है:
- जल में तैरना: मेढक के पश्चपादों (Hind Limbs) में पादजाल (Webbed Feet) पाए जाते हैं। ये पादजाल चप्पू (Paddle) की तरह काम करते हैं और मेढक को पानी में आसानी से तैरने में सहायता करते हैं।
- स्थल पर कूदना: पश्चपादों में लंबी और मजबूत माँसपेशियाँ होती हैं। ये माँसपेशियाँ मेढक को जमीन पर लंबी छलांग लगाने (कूदने) और शिकार से बचने या शिकार पकड़ने में मदद करती हैं।
8. वायुवीय जन्तुओं में अनुकूलन का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर-
🐦 वायुवीय जन्तुओं में अनुकूलन (Adaptation in Aerial Animals)
वायुवीय जन्तु (जैसे पक्षी, चमगादड़ और उड़ने वाले कीट) वे होते हैं जो अपना अधिकांश जीवन उड़ने में व्यतीत करते हैं। इन जीवों में सफलतापूर्वक उड़ान भरने, गति करने और गुरुत्वाकर्षण का विरोध करने के लिए विशिष्ट अनुकूलन पाए जाते हैं।
1. शरीर का आकार और भार में कमी (Body Shape and Weight Reduction)
- हल्की हड्डियाँ (Light Bones): पक्षियों में हड्डियाँ खोखली (Hollow) होती हैं और उनमें हवा भरी होती है (न्यूमेटिक हड्डियाँ), जिससे शरीर का कुल भार बहुत कम हो जाता है।
2. उड़ान के लिए विशेष संरचनाएँ (Special Structures for Flight)
- पंखों का विकास (Development of Wings): अग्रपाद (Forelimbs) उड़ान के लिए आवश्यक पंखों में रूपांतरित हो जाते हैं। पंखों का क्षेत्रफल और आकार उड़ान के लिए पर्याप्त उत्थापन बल (Lift) प्रदान करता है।
3. श्वसन और उपापचय (Respiration and Metabolism)
- वायुकोष (Air Sacs): पक्षियों में फेफड़ों से जुड़े हुए वायुकोषों का जाल होता है। ये वायुकोष न केवल श्वसन क्षमता को बढ़ाते हैं, बल्कि उड़ते समय शरीर को ठंडा रखने और प्लवनशीलता (हल्कापन) प्रदान करने में भी सहायक होते हैं।
9. मंदार किस वातावरण में उगने वाला पौधा है?
उत्तर- मंदार मरुस्थलीय वातावरण में उगने वाला पौधा है
10. किन्हीं दो उभयचर जन्तुओं के नाम लिखिए।
उत्तर-दो उभयचर जन्तुओं के नाम निम्नलिखित हैं –
- मेढक (Frog) 🐸
- सैलामेंडर (Salamander)
11. जलीय अनुकूलन में पंख की भूमिका बताइये।
उत्तर-
जलीय अनुकूलन मे पंख जल मे तैरने / गति करने के लिए आवश्यक हैं ।
12. अपने आस-पास भ्रमण करके जलीय, स्थलीय व वायवीय पक्षियों एवं पौथों के नाम लिखिए।
उत्तर-
ज़रूर, यहाँ सामान्यतः पाए जाने वाले जलीय (Aquatic), स्थलीय (Terrestrial) और वायवीय (Aerial) जन्तुओं और पौधों के तीन-तीन नाम दिए गए हैं:
🐠 जन्तुओं के उदाहरण (Examples of Animals)
| प्रकार (Type) | 3 उदाहरण (3 Examples) |
| जलीय जन्तु | 1. मछली (Fish) |
| 2. डॉल्फिन (Dolphin) | |
| 3. झींगा (Prawn) | |
| स्थलीय जन्तु | 1. गाय (Cow) |
| 2. कुत्ता (Dog) | |
| 3. मनुष्य (Human) | |
| वायवीय जन्तु | 1. कबूतर (Pigeon) |
| 2. चमगादड़ (Bat) | |
| 3. कौआ (Crow) |
🌿 पौधों के उदाहरण (Examples of Plants)
| प्रकार (Type) | 3 उदाहरण (3 Examples) |
| जलीय पौधे (Hydrophytes) | 1. जलकुंभी (Water Hyacinth) |
| 2. कमल (Lotus) | |
| 3. हाइड्रिला (Hydrilla) | |
| स्थलीय पौधे (Mesophytes) | 1. आम (Mango) |
| 2. गुलाब (Rose) | |
| 3. गेंहू (Wheat) |
13. मरुस्थलीय अनुकूलन के लिए ऊँट में किस प्रकार की विशेषताएँ पायी जाती हैं?
उत्तर- मरुस्थलीय (रेगिस्तानी) अनुकूलन के लिए ऊँट में निम्नलिखित विशेषताएँ पाई जाती हैं —
- कूबड़ (Hump): इसमें वसा (fat) संचित रहती है, जो आवश्यकता पड़ने पर ऊर्जा और पानी में परिवर्तित होती है।
- लंबी टाँगें: गर्म रेत से शरीर को दूर रखती हैं।
- घनी पलकें और बंद हो सकने वाली नथुने: आँधी और रेत से आँखों व नाक की रक्षा करती हैं।
- चौड़े और मुलायम खुर: रेत में धँसने से बचाते हैं।
- कम पानी की आवश्यकता: ऊँट कई दिनों तक बिना पानी के रह सकता है।
- मूत्र और मल का संकेन्द्रण: शरीर से जल की हानि बहुत कम होती है।
- शरीर का तापमान सहनशीलता: ऊँट अपने शरीर का तापमान बदल सकता है, जिससे वह गर्मी सहन कर पाता है।
इन अनुकूलनों के कारण ऊँट को “मरुस्थल का जहाज़” कहा जाता है।
14. पक्षियों में उड़ने के लिए अनुकूलन किन विशेषताओं के कारण होता है।
उत्तर-
पक्षियों में उड़ने के लिए अनेक अनुकूलन (adaptations) विशेषताएँ पाई जाती हैं। संक्षेप में प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं –
- शरीर का आकार: पक्षियों का शरीर सुडौल और धारदार (streamlined) होता है, जिससे वायु का प्रतिरोध कम होता है।
- अग्र भुजाएँ पंखों में परिवर्तित: उड़ान के लिए अग्र भुजाएँ (forelimbs) पंखों का रूप ले चुकी हैं।
- हल्की हड्डियाँ: हड्डियाँ खोखली (pneumatic bones) होती हैं, जिससे शरीर हल्का रहता है।
- मजबूत उड़ान पेशियाँ: वक्ष भाग में शक्तिशाली उड़ान पेशियाँ (pectoralis muscles) होती हैं जो पंखों को फड़फड़ाने में मदद करती हैं।
- पंख: पंख (feathers) उड़ान में सहायता करते हैं और शरीर को गर्म रखते हैं।
- सांस लेने की विशेष व्यवस्था: फेफड़ों के साथ वायुकोष (air sacs) होते हैं, जो निरंतर ऑक्सीजन की आपूर्ति करते हैं।
- तीव्र चयापचय (metabolism): उड़ान के लिए अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है, इसलिए पक्षियों का चयापचय तीव्र होता है।
इन सभी विशेषताओं के कारण पक्षी वायु में आसानी से उड़ सकते हैं।
प्रोजेक्ट कार्य–
नोट –प्रोजेक्ट कार्य छात्र स्वयं करेंगे।
प्रश्नोत्तरी [ quiz ]
इकाई 7 – जीवों में अनुकूलन
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प्रश्नोत्तरी अभी तैयार की जा रही है जल्द ही आपके लिए प्रस्तुत की जाएगी
