“शिक्षा जीवन की तैयारी नहीं है; शिक्षा ही जीवन है।” ~ जॉन डेवी
– अभ्यास प्रश्न –
इकाई 11 – पौधों में जनन
1. निम्नलिखित प्रश्नों में सही विकल्प (✓) छाँटकर लिखिए-
(क) नर और मादा युग्मक के युग्मन का प्रक्रम कहलाता है।
(1) निषेचन ✅
(2) परागण
(3) जनन
(4) बीज निर्माण
(ख) परिपक्व होने पर अण्डाशय विकसित हो जाता है-
(1) बीज में
(2) पुंकेसर में
(3) स्त्रीकेसर में
(4) फल में ✅
(ग) अजुबा अपने जिस भाग द्वारा जनन करता है, वह है-
(1) तना
(2) पत्ती ✅
(3) जड़
(4) पुष्प
(घ) पौधे के जनन अंग है-
(1) जड़
(2) तना
पत्ती
(4) फूल ✅
(ङ) परागकण का वर्तिकाग्र पर स्थानान्तरण कहलाता है-
(1) निषेचन
(2) परागण ✅
(3) जनन
(4) फल का बनना
2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-
उत्तर-
(क) जनक पौधों के कायिक भागों से नए पौधोंका उत्पन्न होना कायिक/वर्धी जनन कहलाता है।
(ख) जिन फूलों में केवल नर या केवल मादा जनन अंग होते हैं वे एकीलंगी पुष्प कहे जाते हैं।
(ग) परागकोष से परागकणों का वर्तिकाग्र पर स्थानान्तरण की क्रिया परागण कहलाती है।
(घ) नर और मादा युग्मकों का युग्मन निषेचन कहलाता है।
(ङ) बीज का प्रकीर्णन वायु, जल और जन्तुओं के द्वारा होता है।
3. निम्नलिखित में सही कथनों पर सही (✅) तथा गलत कथनों पर गलत (❌) का चिह्न लगाइये।
(अ) स्पाइरोगाइरा तथा यूलोथ्रिक्स खण्डन विधि से प्रजनन करते हैं। (✅)
(ब) कलम लगाना कृत्रिमवर्षीप्रजनन है। (✅)
(स) यीस्ट में जनन खण्डन विधि द्वारा होता है। (❌)
(द) स्त्रीकेसर पुष्प का नर भाग है। (❌)
(य) पुष्प के सभी भाग पुष्पासन पर टिके होते हैं। (✅)
4. स्तम्भ क में दिए गए शब्दों का स्तम्भ ख से मिलान कीजिए-
उत्तर-

5. निषेचन किसे कहते हैं ?
उत्तर- निषेचन वह क्रिया है जब नर युग्मक और मादा युग्मक आपस में मिल जाते हैं।
6. पौधों में अलैंगिक जनन की विभिन्न विधियों का वर्णन कीजिए। प्रत्येक का उदाहरण दीजिए।
उत्तर-
पौधों में अलैंगिक जनन (Asexual Reproduction) मुख्य रूप से चार तरीकों से होता है:
1. मुकुलन (Budding) 🪴
- यह विधि एककोशिकीय जीवों जैसे यीस्ट में होती है।
- यीस्ट की मूल कोशिका से एक छोटा उभार (मुकुल या कली) निकलता है।
- यह मुकुल धीरे-धीरे विकसित होकर अपनी जनक कोशिका से अलग हो जाता है और एक नई यीस्ट कोशिका बन जाती है।
- मुकुलन इतनी तेज़ी से होता है कि कई बार नए मुकुल जनक कोशिका से अलग हुए बिना ही एक श्रृंखला के रूप में जुड़े रहते हैं।
2. खण्डन (Fragmentation) 🌿
- जब किसी तंतुमय जीव (फिलामेंट) के टुकड़े टूट जाते हैं और प्रत्येक टुकड़ा एक नए पौधे को जन्म देता है, तो यह विधि खण्डन कहलाती है।
- स्पाइरोगाइरा और यूलोथ्रिक्स जैसे शैवाल (Algae) इसी विधि से प्रजनन करते हैं।
3. बीजाणु द्वारा (By Spores) 🍄
- यह विधि कवक (फफूंद), शैवाल, मॉस और फर्न में पाई जाती है।
- कवक में धागे जैसी संरचनाओं (कवक तंतु) के ऊपरी सिरे फूलकर अत्यंत छोटी संरचनाएँ बनाते हैं जिन्हें बीजाणु (Spores) कहते हैं।
- ये बीजाणु प्रतिकूल परिस्थितियों में भी जीवित रह सकते हैं।
- जब ये हवा द्वारा अनुकूल स्थान पर गिरते हैं, तो अंकुरित होकर नया कवक/पौधा बना देते हैं।
4. वर्धी या कायिक प्रजनन (Vegetative Propagation) 🌱
- जब पौधे के कायिक भागों जैसे जड़, तना, या पत्ती से एक नया पौधा उत्पन्न होता है, तो इसे वर्धी प्रजनन कहते हैं।
- इस प्रक्रिया में बीज की आवश्यकता नहीं होती।
- उदाहरण:
- जड़ों द्वारा: शकरकंद, डहेलिया, सतावर।
- तने द्वारा: आलू, अदरक, गन्ना।
यह पौधों में अलैंगिक जनन के मुख्य प्रकारों का संक्षिप्त विवरण है।
7. स्व-परागण तथा पर-परागण में अन्तर लिखिए।
उत्तर-
स्व-परागण तथा पर-परागण में अन्तर-
- स्व-परागण (Self-Pollination):
- जब परागकण उसी फूल के वर्तिकाग्र पर, या
- उसी पौधे के किसी दूसरे फूल के वर्तिकाग्र पर पहुँचते हैं।
- पर-परागण (Cross-Pollination):
- जब परागकण निकलकर उसी प्रजाति के किसी दूसरे पौधे के फूल के वर्तिकाग्र पर पहुँचते हैं।
8. किसी पुष्प का चित्र खींचकर उनके जनन अंगों को नामांकित कीजिए।
उत्तर-

9. अलैगिंक तथा लैंगिक जनन में अन्तर लिखिए।
उत्तर-
| अंतर का आधार | अलैंगिक जनन (Asexual Reproduction) | लैंगिक जनन (Sexual Reproduction) |
| जनकों की संख्या | केवल एक जनक की आवश्यकता होती है। | दो जनक (नर और मादा) की आवश्यकता होती है। |
| युग्मक निर्माण | युग्मक (Gametes) नहीं बनते हैं। | युग्मक (नर और मादा) बनते हैं। |
| निषेचन (Fertilization) | निषेचन नहीं होता है। | निषेचन होता है (नर और मादा युग्मक का संलयन)। |
| कोशिका विभाजन | मुख्य रूप से समसूत्री विभाजन (Mitosis) होता है। | युग्मक निर्माण के लिए अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis) और विकास के लिए समसूत्री विभाजन होता है। |
| आनुवंशिक भिन्नता | जनक कोशिका की ठीक प्रतिलिपि (क्लोन) बनती है, इसलिए भिन्नता नगण्य होती है। | आनुवंशिक भिन्नता (Genetic Variation) अधिक होती है, जो विकास के लिए महत्वपूर्ण है। |
| प्रजनन की गति | यह प्रक्रिया तेज़ होती है। | यह प्रक्रिया धीमी होती है। |
| उदाहरण | अमीबा, यीस्ट, स्पाइरोगाइरा, आलू (कायिक जनन)। | मनुष्य, अधिकांश जंतु, फूल वाले पौधे। |
10. बीजों के प्रकीर्णन की विभिन्न विधियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
बीजों का प्रकीर्णन
प्रकृति में फलों और बीजों के फैलने (एक जगह से दूसरी जगह जाने) को प्रकीर्णन कहते हैं। यह मुख्य रूप से तीन साधनों द्वारा होता है: हवा, पानी और जंतु।
- वायु द्वारा प्रकीर्णन:
- हल्के वजन वाले बीज, या पंखों (जैसे चिलबिल, मेपिल) या रोयें (जैसे घास, मदार, सूरजमुखी) वाले बीज हवा में उड़कर दूर-दूर तक पहुँच जाते हैं।
- जल द्वारा प्रकीर्णन:
- नारियल जैसे फलों का बाहरी आवरण रेशेदार और तैरने योग्य होता है। इससे वे पानी में बहते हुए दूसरे स्थानों तक चले जाते हैं।
- जंतुओं द्वारा प्रकीर्णन:
- पक्षियों द्वारा: पीपल और बरगद जैसे पेड़ों के फलों को पक्षी खाते हैं, लेकिन उनके बीज को पचा नहीं पाते। ये बीज पक्षियों की बीट (अपशिष्ट) के साथ बाहर निकलकर उग जाते हैं।
- चिपककर: कुछ पौधों के काँटेदार या हुकनुमा बीज होते हैं, जो जानवरों के शरीर (बालों या फर) से चिपक जाते हैं और इस तरह दूर स्थानों तक पहुँच जाते हैं।
- झटके से फटना:
- कुछ पौधे, जैसे मटर और अरण्ड, अपने फलों को झटके से फाड़ देते हैं। इस विस्फोट से बीज दूर जाकर गिरते हैं, जिससे वे मूल पौधे से दूर हो जाते हैं।
प्रोजेक्ट कार्य–
प्रश्नोत्तरी [ quiz ]
इकाई 11 – पौधों में जनन
