दिव्यांगजन जिन्होंने दुनिया बदल दी
अंतरराष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस • 3 दिसंबर 2025
सीमाएँ कभी सपनों की उड़ान नहीं रोक सकतीं
21 साल की उम्र में डॉक्टरों ने कहा था — सिर्फ 2 साल और जी पाओगे। हॉकिंग 55 साल तक जीए और ब्रह्मांड को समझने की सबसे बड़ी किताबें लिखीं।
मुख्य उपलब्धियाँ
- हॉकिंग रेडिएशन सिद्धांत
- ब्लैक होल और बिग बैंग पर क्रांतिकारी विचार
- व्हीलचेयर और वॉयस सिंथेसाइज़र से दुनिया को पढ़ाया
बचपन में देर से बोलना शुरू किया, लोग समझते थे “धीमे दिमाग” का है। बाद में E=mc² दिया और दुनिया बदल दी।
मुख्य उपलब्धियाँ
- विशेष और सामान्य सापेक्षता सिद्धांत
- प्रकाश-विद्युत प्रभाव (नोबेल पुरस्कार)
- GPS तकनीक आज उनके सिद्धांत पर चलती है
पढ़ने-लिखने में बहुत दिक्कत थी, लेकिन दुनिया की पहली मास-प्रोडक्शन कार “Model T” बनाई।
मुख्य उपलब्धियाँ
- असेंबली लाइन — आधुनिक फैक्ट्री का जन्म
- मज़दूरों को 5 डॉलर प्रतिदिन वेतन — उस ज़माने में बहुत ज्यादा!
उनकी माँ और पत्नी दोनों बधिर थीं। इसी दर्द से टेलीफोन का जन्म हुआ।
मुख्य उपलब्धियाँ
- टेलीफोन का पेटेंट (1876)
- बधिर बच्चों की शिक्षा के लिए स्कूल खोले
1840 के दशक में ही कंप्यूटर प्रोग्राम लिख दिया था — 100 साल पहले!
17 साल की उम्र में दुर्घटना में पैर गँवाया, फिर जयपुर फुट से भरतनाट्यम में वापसी की और फिल्म “नाचे मयूरी” बनी।
